जानवर
पूँछ का कमाल
गिलहरी की बड़ी पूँछ का रहस्य
साइयूरस वल्गैरिस, जिसे सामान्यतः लाल गिलहरी कहा जाता है, अपनी फुर्ती और घने बालों वाली बड़ी पूँछ के कारण आसानी से पहचानी जाती है।
पहली नज़र में उसकी पूँछ शरीर का सजावटी हिस्सा लग सकती है, लेकिन वास्तव में यह उसके जीवन के लिए बेहद उपयोगी अंग है। पेड़ों पर तेज़ी से दौड़ते समय संतुलन बनाए रखने से लेकर ठंड में शरीर को गर्म रखने तक, इसकी पूँछ कई महत्वपूर्ण काम करती है।
पेड़ों पर संतुलन बनाने में मदद
गिलहरी का जीवन पेड़ों की शाखाओं के बीच तेज़ी से घूमने पर निर्भर करता है। वह एक शाखा से दूसरी शाखा पर छलाँग लगाते समय शरीर की दिशा बदलती है और इसी दौरान उसकी पूँछ संतुलन बनाने में मदद करती है। पूँछ हवा में एक तरह के संतुलन-डंडे की तरह काम करती है, जिससे गिलहरी अचानक मुड़ते या उतरते समय अपने शरीर को स्थिर रख सकती है।
दौड़ते समय पूँछ क्यों हिलती है?
जब गिलहरी पेड़ की पतली शाखा पर दौड़ती है, तो शरीर के हर छोटे बदलाव का असर उसके संतुलन पर पड़ सकता है। पूँछ की स्थिति बदलकर वह अपने शरीर के भार-वितरण को नियंत्रित करती है। तेज़ मोड़ लेते समय पूँछ एक तरफ झुक सकती है, जबकि छलाँग के दौरान वह शरीर को स्थिर रखने में सहायक होती है।
कूदने में बनती है प्राकृतिक पतवार
गिलहरी को पेड़ों के बीच छलाँग लगाते देखना रोमांचक होता है। छलाँग के दौरान उसकी पूँछ शरीर की दिशा और गति को नियंत्रित करने में सहायक होती है। इसे पूरी तरह पक्षियों के पंखों जैसा उड़ान अंग नहीं समझना चाहिए, लेकिन हवा में शरीर की मुद्रा को नियंत्रित करने में इसका योगदान महत्वपूर्ण है। इससे गिलहरी को सुरक्षित ढंग से दूसरी शाखा तक पहुँचने में मदद मिलती है।
ठंड से बचने की प्राकृतिक चादर
बड़ी पूँछ का एक और महत्वपूर्ण काम गर्माहट बनाए रखना है। ठंडे मौसम में गिलहरी अपनी पूँछ को शरीर के चारों ओर लपेट सकती है। घने बाल हवा की सीधी ठंड को कम करने में मदद करते हैं और शरीर के पास मौजूद गर्म हवा को कुछ हद तक बनाए रखते हैं। यही कारण है कि सर्दियों में आराम करते समय उसकी पूँछ शरीर के ऊपर या आसपास दिखाई दे सकती है।
बारिश में भी उपयोगी
घने बालों वाली पूँछ मौसम से बचाव में भी सहायक हो सकती है। वर्षा के दौरान गिलहरी अपने शरीर की मुद्रा बदलकर पूँछ को इस तरह रख सकती है कि सिर और शरीर का कुछ हिस्सा सीधे गिरती बूंदों से बच सके। हालाँकि यह पूरी तरह जलरोधी आवरण नहीं है, फिर भी घनी फर वाली पूँछ बदलते मौसम में अतिरिक्त सुरक्षा देती है।

खतरे का संकेत देने में भूमिका
गिलहरी की पूँछ केवल शारीरिक संतुलन के लिए नहीं होती। अचानक पूँछ हिलाना या उसे तेजी से फड़फड़ाना उसके व्यवहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। किसी शिकारी या संभावित खतरे को देखकर गिलहरी सतर्क हो जाती है और उसकी पूँछ की गतिविधि भी बदल सकती है। इससे आसपास मौजूद दूसरी गिलहरियों को संभावित खतरे का संकेत मिल सकता है।
आँखों को पूँछ से समझना आसान संकेत
गिलहरी के व्यवहार को देखते समय पूँछ पर ध्यान देना उपयोगी है। सामान्य अवस्था में पूँछ शरीर के पीछे सहज रूप से रहती है, जबकि डर या उत्तेजना में उसकी गतिविधियाँ अधिक स्पष्ट हो सकती हैं। हालाँकि केवल पूँछ देखकर गिलहरी की मनःस्थिति तय नहीं करनी चाहिए। उसके कान, शरीर की मुद्रा, आवाज़ और आसपास की परिस्थिति को भी साथ में देखना ज़रूरी है।
पूँछ इतनी घनी क्यों होती है?
पूँछ की घनी फर केवल उसे आकर्षक नहीं बनाती। इसमें कई महीन बाल होते हैं, जो शरीर की गर्मी बनाए रखने और मौसम से बचाव में योगदान देते हैं। अलग-अलग मौसम में फर की घनत्व और दिखाई देने वाली बनावट बदल सकती है। इसी कारण एक ही गिलहरी अलग मौसमों में थोड़ी अलग दिखाई दे सकती है।
पेड़ पर चढ़ने की कला
गिलहरी की पूँछ उसके पंजों और मजबूत पिछले पैरों के साथ मिलकर काम करती है। पंजे छाल को पकड़ते हैं, पैर शरीर को आगे बढ़ाते हैं और पूँछ शरीर की स्थिति को संतुलित करने में सहायता करती है। इस समन्वय के कारण गिलहरी ऊर्ध्वाधर तने पर चढ़ने और पतली शाखाओं पर चलने में इतनी कुशल दिखाई देती है।
हर बड़ी पूँछ का एक ही काम नहीं
प्रकृति में पूँछ का आकार और उपयोग प्रजाति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। लाल गिलहरी में यह विशेष रूप से घनी और रोएँदार होती है। इसलिए इसकी पूँछ को केवल आकार देखकर किसी एक काम से जोड़ना सही नहीं होगा। संतुलन, शरीर की मुद्रा, गर्माहट और व्यवहार संबंधी संकेत—कई भूमिकाएँ एक साथ जुड़ी हुई हैं।
क्या पूँछ कट जाने पर गिलहरी जी सकती है?
पूँछ गिलहरी के लिए अत्यंत उपयोगी है, लेकिन यह उसके जीवित रहने का अकेला आधार नहीं है। चोट लगने पर गिलहरी कुछ सामान्य गतिविधियाँ जारी रख सकती है, परंतु संतुलन और ताप-संरक्षण जैसे काम कठिन हो सकते हैं। यदि किसी घायल गिलहरी की पूँछ पर चोट दिखाई दे, तो उसे पकड़ने या स्वयं उपचार करने के बजाय स्थानीय वन्यजीव बचाव संस्था या पशु चिकित्सक से सहायता लेना बेहतर है।
तस्वीर में पूँछ से क्या समझें?
यदि किसी तस्वीर में गिलहरी अपनी पूँछ को ऊपर उठाए, शरीर के चारों ओर लपेटे या एक ओर फैलाए दिखाई दे, तो यह केवल मुद्रा नहीं हो सकती। वह संतुलन बना रही हो सकती है, मौसम से बच रही हो सकती है या आसपास की गतिविधि के प्रति सतर्क हो सकती है। इसलिए पूँछ को गिलहरी के पूरे व्यवहार का हिस्सा मानकर देखना अधिक सही है।

निष्कर्ष
गिलहरी की बड़ी पूँछ प्रकृति की एक शानदार बहुउपयोगी रचना है। साइयूरस वल्गैरिस के लिए यह पेड़ों पर संतुलन बनाए रखने, छलाँग के दौरान शरीर को नियंत्रित करने, ठंड से बचने और संभावित खतरे के समय व्यवहारिक संकेत देने में मदद करती है। अगली बार जब किसी पेड़ पर गिलहरी अपनी पूँछ फड़फड़ाती या शरीर के चारों ओर लपेटे दिखाई दे, तो उसे केवल सुंदरता का हिस्सा न समझें—उस छोटी-सी पूँछ में उसके जीवन से जुड़ी कई बड़ी भूमिकाएँ छिपी हैं।