पौधे
फूलों की चमक
रंगों का प्राकृतिक रहस्य
लाल गुलाब, पीले गेंदा, नीले अपराजिता और बैंगनी फूल प्रकृति को रंगों से भर देते हैं। लेकिन फूलों की यह चमक केवल सुंदरता के लिए नहीं होती। कई पौधों में पंखुड़ियों का चटख रंग परागण करने वाले जीवों को आकर्षित करने का एक प्रभावी संकेत होता है।
जब मधुमक्खी, तितली या कोई पक्षी फूल तक पहुंचता है, तो उसके शरीर पर पराग चिपक सकता है और दूसरे फूल तक पहुंचकर पौधे के प्रजनन में सहायता कर सकता है।
पंखुड़ियों में छिपे वर्णक
फूलों के रंग उनकी पंखुड़ियों में मौजूद प्राकृतिक वर्णकों से बनते हैं। एंथोसाइनिन लाल, गुलाबी, बैंगनी और नीले रंगों की छटाओं से जुड़ा होता है, जबकि कैरोटिनॉइड पीले और नारंगी रंग प्रदान कर सकते हैं। इन वर्णकों की मात्रा और फूल की कोशिकाओं के भीतर की रासायनिक स्थिति बदलने पर रंग की तीव्रता भी बदल सकती है। इसलिए कुछ फूल हल्के और कुछ उसी रंग के होते हुए भी बेहद चटख दिखाई देते हैं।
परागणकर्ता को बुलाने का संकेत
फूल के लिए उसका रंग एक तरह का दृश्य संकेत हो सकता है। खुले मैदान या घास के बीच चमकीली पंखुड़ियाँ आसपास की हरियाली से अलग दिखाई देती हैं। इससे उड़ते हुए परागणकर्ता को फूल पहचानने में मदद मिल सकती है। हालांकि रंग अकेला पर्याप्त नहीं होता। फूल की गंध, आकार, मकरंद और खिलने का समय भी यह तय करने में भूमिका निभाते हैं कि कौन-सा जीव उसकी ओर आएगा।
कीटों की नजर अलग होती है
मनुष्य और कीट फूलों को बिल्कुल एक जैसे नहीं देखते। मधुमक्खियाँ पराबैंगनी प्रकाश के प्रति संवेदनशील होती हैं। इसलिए कुछ फूलों पर ऐसे निशान दिखाई दे सकते हैं जिन्हें मनुष्य सामान्य आंखों से नहीं देख पाता। पंखुड़ियों पर बने ये निशान फूल के केंद्र की ओर संकेत कर सकते हैं। इस तरह जिस फूल को हमें केवल एक रंगीन आकृति दिखाई देती है, वह किसी मधुमक्खी के लिए कई अलग-अलग दृश्य संकेतों वाला मार्ग हो सकता है।
रंग के साथ गंध भी
कई फूलों की पहचान केवल उनके रंग से नहीं होती। कुछ फूलों में तेज़ सुगंध होती है, जबकि कुछ लगभग गंधहीन होते हैं। रात में खिलने वाले फूलों के लिए सुगंध विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि अंधेरे में रंगों की उपयोगिता सीमित हो जाती है। ऐसे फूल उन जीवों को आकर्षित करने के लिए सुगंध का सहारा ले सकते हैं जो रात में सक्रिय रहते हैं। इससे पता चलता है कि पौधे अलग परिस्थितियों में अलग संकेतों का इस्तेमाल करते हैं।
पंखुड़ियों पर बने निशान
कुछ फूलों की पंखुड़ियों पर गहरी धारियाँ, बिंदु या केंद्र की ओर जाती हुई रेखाएँ दिखाई देती हैं। ये आकृतियाँ हमेशा केवल सजावट नहीं होतीं। कई मामलों में ऐसे निशान परागणकर्ता को मकरंद या पराग वाले हिस्से तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं। यदि फूल को एक छोटे से मानचित्र की तरह देखें, तो पंखुड़ियों के ये संकेत उसके केंद्र की दिशा बताने वाले रास्ते की तरह काम कर सकते हैं।

हर रंग का असर समान नहीं
किसी रंग का आकर्षण इस बात पर निर्भर करता है कि फूल को कौन-सा जीव देख रहा है। मनुष्य को लाल रंग बहुत स्पष्ट दिखाई दे सकता है, जबकि किसी विशेष कीट के लिए नीला या पीला अधिक आसानी से पहचाना जा सकता है। कुछ पक्षियों की दृष्टि भी मनुष्य से अलग होती है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि कोई एक रंग सभी परागणकर्ताओं को समान रूप से आकर्षित करता है।
मकरंद की भूमिका
फूल का रंग किसी जीव को पास ला सकता है, लेकिन मकरंद उसे फूल के भीतर जाने का कारण दे सकता है। मकरंद कई परागणकर्ताओं के लिए ऊर्जा का स्रोत होता है। जब मधुमक्खी या तितली मकरंद लेने के लिए पंखुड़ियों के बीच पहुंचती है, तो पराग उसके शरीर पर लग सकता है। बाद में दूसरे फूल पर जाते समय वही पराग स्थानांतरित हो सकता है और परागण की प्रक्रिया में योगदान दे सकता है।
फूल रंग बदल सकते हैं
कुछ पौधों में फूल खिलने के बाद रंग बदलता है। यह बदलाव परागणकर्ताओं को संकेत देने का एक तरीका हो सकता है। नया फूल अधिक आकर्षक दिखाई दे सकता है, जबकि परागण के बाद उसका रंग बदलने से जीव को पता चल सकता है कि वहां रुकने का लाभ कम है। इससे वह दूसरे नए फूल की ओर बढ़ सकता है। हालांकि यह विशेषता सभी पौधों में नहीं होती।
मिट्टी और मौसम का प्रभाव
फूल का रंग केवल उसकी प्रजाति से तय नहीं होता। प्रकाश, तापमान, पानी की उपलब्धता और पौधे की अवस्था भी रंग की तीव्रता को प्रभावित कर सकती है। कुछ फूलों में मिट्टी की अम्लीयता या क्षारीयता के कारण रंग में बदलाव देखा जाता है। यही कारण है कि एक ही पौधे के फूल अलग परिस्थितियों में थोड़े अलग रंग के दिखाई दे सकते हैं।
चमकीला रंग ही सब कुछ नहीं
फूल का चटख रंग उसे सफल परागण की गारंटी नहीं देता। पौधे को सही समय पर खिलना, पर्याप्त पानी और पोषक तत्व मिलना तथा उपयुक्त परागणकर्ता तक पहुंचना भी जरूरी है। यदि किसी क्षेत्र में उसके प्रमुख परागणकर्ता कम हैं, तो बहुत आकर्षक फूल होने के बावजूद प्रजनन की सफलता प्रभावित हो सकती है। रंग केवल पूरी रणनीति का एक हिस्सा है।
बगीचे में रंगों की उपयोगिता
घर के बगीचे में अलग-अलग रंग और आकार के स्थानीय फूल लगाना परागण करने वाले जीवों के लिए उपयोगी हो सकता है। केवल सुंदरता देखकर पौधे चुनने के बजाय यह देखना भी अच्छा है कि वे स्थानीय मौसम और मिट्टी में अच्छी तरह बढ़ सकते हैं या नहीं। अलग-अलग समय पर खिलने वाले पौधों का चुनाव करने से लंबे समय तक फूल उपलब्ध रह सकते हैं और बगीचे में विविधता बनी रहती है।
सुंदरता के पीछे जीवनचक्र
फूलों की चमक को केवल प्रकृति की सजावट समझना अधूरा होगा। रंग, गंध, आकार और मकरंद मिलकर पौधे तथा उसके आसपास के जीवों के बीच एक जटिल संबंध बनाते हैं। इन विशेषताओं से परागणकर्ता को भोजन खोजने में मदद मिल सकती है और पौधे को परागण का अवसर मिल सकता है। इस तरह चमकीली पंखुड़ियाँ फूल के जीवनचक्र और अगली पीढ़ी के निर्माण से जुड़ी होती हैं।

अगली बार गौर से देखें
जब अगली बार कोई चटख फूल दिखाई दे, तो केवल उसका रंग देखने के बजाय उसकी पंखुड़ियों पर बने निशान, केंद्र का आकार और उसकी गंध पर भी ध्यान दें। हो सकता है कि ये सभी विशेषताएँ किसी परागणकर्ता के लिए अलग-अलग संकेत हों। फूलों के चमकीले रंग दरअसल प्रकृति की ऐसी व्यवस्था हैं, जिसमें सुंदरता और उपयोगिता एक साथ दिखाई देती हैं।